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बेंगलुरु में 4 तेंदुओं की मौत, मृतकों में गर्भवती मादा भी शामिल, अवैध रॉक ब्लास्टिंग की चपेट में आने से गई जान

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Posted On:Friday, January 2, 2026

बेंगलुरु: कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु के बाहरी इलाके में स्थित कग्गलीपुरा रेंज के बसवनपुरा वन क्षेत्र से एक हृदयविदारक घटना सामने आई है। यहाँ के आरक्षित वन क्षेत्र में चार तेंदुओं के शव क्षत-विक्षत अवस्था में मिले हैं। वन विभाग द्वारा की गई प्रारंभिक जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि मृतकों में से एक मादा तेंदुआ गर्भवती थी, जिसके गर्भ में तीन अजन्मे शावक थे। इस घटना ने वन्यजीव प्रेमियों और प्रशासन के बीच हड़कंप मचा दिया है।

खदान में विस्फोट और पत्थरों की चोट बनी काल

वन अधिकारियों के अनुसार, यह घटना केवल एक प्राकृतिक मृत्यु नहीं बल्कि मानवीय लापरवाही का परिणाम लग रही है। जिस स्थान पर तेंदुओं के शव मिले हैं, उसके समीप ही एक पत्थर की खदान (Stone Quarry) स्थित है। वन विभाग का अनुमान है कि जंगल के बेहद करीब स्थित इस खदान में भारी विस्फोट (Blasting) किया गया था। इस विस्फोट के प्रभाव से चट्टानों के बड़े-बड़े टुकड़े उछलकर जंगल के अंदर गिरे, जिनकी चपेट में आने से इन बेजुबान जानवरों की मौत हो गई। मौके पर कई ऐसे भारी पत्थर मिले हैं जिन पर खून के निशान मौजूद हैं, जो इस थ्योरी की पुष्टि करते हैं।

विधायक एस.टी. सोमशेखर ने उठाए सवाल

इस त्रासदी ने अब राजनीतिक मोड़ ले लिया है। यशवंतपुर क्षेत्र के भाजपा विधायक एस.टी. सोमशेखर ने इस मामले को लेकर राज्य सरकार और वन विभाग पर कड़ा प्रहार किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस क्षेत्र में लंबे समय से अवैध ब्लास्टिंग का खेल चल रहा है, जिसकी जानकारी अधिकारियों को होने के बावजूद कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए। सोमशेखर ने वन मंत्री ईश्वर खंड्रे को पत्र लिखकर जवाब मांगा है और मांग की है कि इस घटना के लिए जिम्मेदार खदान मालिकों और लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर तत्काल एफआईआर दर्ज की जाए।

जांच के घेरे में अवैध खनन माफिया

घटना की गंभीरता को देखते हुए कर्नाटक के वन मंत्री ईश्वर खंड्रे ने उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि यह साबित होता है कि खदान में नियमों के विरुद्ध जाकर विस्फोट किया गया था, तो संबंधित लाइसेंस रद्द कर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। वन विभाग की एक विशेष टीम अब यह पता लगाने में जुटी है कि क्या खदान की सीमा वन भूमि के भीतर तक फैली हुई थी। इस घटना के बाद पर्यावरणविदों ने मांग की है कि संवेदनशील वन क्षेत्रों और वन्यजीव गलियारों (Wildlife Corridors) के आसपास खनन गतिविधियों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए।


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