झांसी न्यूज डेस्क: अहमदाबाद की साइबर क्राइम ब्रांच ने चार देशों—भारत, चीन, पाकिस्तान और हांगकांग—में फैले एक बड़े 'बॉस स्कैम' (Boss Scam) नेटवर्क का भंडाफोड़ करते हुए पश्चिम बंगाल से दो आरोपियों, इमरान अली पियादा और इंजाममुल, को गिरफ्तार किया है। पुलिस का आरोप है कि ये दोनों फर्जी सिम कार्ड, मोबाइल नंबर, ओटीपी और वॉट्सऐप अकाउंट की सप्लाई करके इस अंतरराष्ट्रीय साइबर गिरोह को 'साइबर अपराध सेवा' (Cybercrime as a Service) प्रदान कर रहे थे। इस गिरोह के तार विदेश में बैठे साइबर अपराधियों से जुड़े हुए थे, जो कंपनियों के वरिष्ठ अधिकारियों के नाम पर कर्मचारियों से धोखाधड़ी करते थे।
मुख्य आरोपी इमरान अली पियादा विभिन्न टेलीकॉम कंपनियों के पॉइंट-ऑफ़-सेल (PoS) एजेंट के रूप में काम करता था और ग्राहकों के बायोमेट्रिक डेटा का दुरुपयोग कर उनकी अनजाने में डमी सिम कार्ड चालू कर लेता था। पुलिस जांच में सामने आया कि पियादा ने पिछले पांच सालों में ई-कॉमर्स और ऑनलाइन गेमिंग के लिए लगभग 21,000 ओटीपी बेचे, जिससे उसने करीब 21 लाख रुपये कमाए। इसके अलावा उसने वॉट्सऐप अकाउंट एक्टिवेट कराने के लिए लगभग 900 ओटीपी ₹250 प्रति ओटीपी के हिसाब से बेचकर मोटा कमीशन हासिल किया।
पुलिस की तकनीकी जांच में खुलासा हुआ है कि इस रैकेट में इस्तेमाल किया गया मैलवेयर चीन से जुड़े डेवलपर्स द्वारा तैयार किया गया था, जबकि इसे इस्लामाबाद स्थित एक कॉल सेंटर के जरिए भारतीय नागरिकों को निशाना बनाने के लिए संचालित किया जा रहा था। इस ठगी में इस्तेमाल किए जा रहे बैंक खातों को चीन-आधारित वीपीएन (VPN) सेवाओं के जरिए एक्सेस किया जाता था। इस बहुराष्ट्रीय नेटवर्क के डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर का विश्लेषण कर अहमदाबाद पुलिस ने 10,000 से अधिक संक्रमित डिवाइसों को सुरक्षित किया और नागरिकों को करोड़ों रुपये की संभावित वित्तीय धोखाधड़ी से बचा लिया।
'बॉस स्कैम' के तहत जालसाज़ किसी कंपनी के सीईओ या निदेशक बनकर कर्मचारियों को वॉट्सऐप पर एक जिप (ZIP) फाइल भेजते हैं, जिसमें हानिकारक '.exe' या '.dll' फाइलें होती हैं। जैसे ही कोई कर्मचारी इस फाइल को कंप्यूटर पर वॉट्सऐप वेब के जरिए खोलता है, अपराधियों को उसके सेशन का एक्सेस मिल जाता है। इसके बाद आरोपी अपने नंबर पर कंपनी के बॉस का नाम और फोटो लगाकर वित्त विभाग के कर्मचारियों को तुरंत पैसे ट्रांसफर करने के निर्देश देते हैं, जिससे कर्मचारी भ्रमित होकर बिना पुष्टि किए रकम भेज देते हैं।