झांसी न्यूज डेस्क: झांसी में बुंदेलखंड क्षेत्र के सबसे बड़े पुस्तक मेले की धूम मची हुई है। बुंदेलखंड विश्वविद्यालय में आयोजित इस सात दिवसीय मेले का उद्घाटन कुलपति प्रो. मुकेश पांडेय, नालंदा विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सिद्धार्थ सिंह और कमिश्नर बिमल कुमार दुबे ने किया। मेले में देशभर से आए 60 से अधिक प्रकाशक 1 लाख से ज्यादा किताबें लेकर पहुंचे हैं। यहां हिंदी के साथ-साथ अन्य भाषाओं की किताबें भी उपलब्ध हैं, साथ ही विज्ञान और तकनीक से जुड़ी पुस्तकें भी पाठकों को आकर्षित कर रही हैं।
बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. मुकेश पांडेय का मानना है कि किताबें न केवल ज्ञान का स्रोत हैं, बल्कि अकेलेपन की साथी भी हैं। उन्होंने कहा कि जीवन में अनुभव से ज्ञान मिलता है, लेकिन पुस्तकों के माध्यम से हम अनगिनत अनुभवों को एक साथ पा सकते हैं। डिजिटल दौर में भी किताबों के पन्ने पलटकर पढ़ने का आनंद अनमोल है, जिसे कोई इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस नहीं दे सकती। इस पुस्तक मेले के जरिए विद्यार्थियों और साहित्य प्रेमियों को नए विषयों को जानने और पढ़ने का शानदार मौका मिल रहा है।
कमिश्नर बिमल कुमार दुबे ने कहा कि मोबाइल और इंटरनेट के बढ़ते प्रभाव के कारण आज लोग किताबों से दूर होते जा रहे हैं, लेकिन वास्तविक ज्ञान का सबसे सशक्त माध्यम पुस्तकें ही हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि शिक्षक से प्राप्त शिक्षा के अलावा आत्म-अध्ययन भी जरूरी है। किताबें न केवल नई जानकारी देती हैं, बल्कि हमारे चरित्र निर्माण में भी अहम भूमिका निभाती हैं। उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस चित्र बना सकता है, लेकिन चरित्र नहीं, और यही किताबों की सबसे बड़ी ताकत है।