झांसी न्यूज डेस्क: झांसी में दतिया नगर पालिका परिषद के स्थापना क्लर्क दिलीप सिंह आत्महत्या मामले में नामजद मुख्य नगर पालिका अधिकारी (सीएमओ) नागेंद्र सिंह गुर्जर को अदालत से राहत नहीं मिली है। अपर सत्र न्यायाधीश अनुभव द्विवेदी ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि आरोपी के खिलाफ प्रथम दृष्टया पर्याप्त सामग्री उपलब्ध है और मामला गंभीर प्रकृति का है, इसलिए अग्रिम जमानत दिए जाने का आधार नहीं बनता।
दिलीप सिंह ने 22 फरवरी 2026 को अपने घर में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी। उनका शव घर की पहली मंजिल पर बने कमरे में लटका मिला था। आत्महत्या से पहले उन्होंने एक वीडियो भी बनाया था। घटना के बाद उनकी पत्नी माधुरी सिंह ने प्रेमनगर थाने में आत्महत्या के लिए उकसाने सहित अन्य धाराओं में मामला दर्ज कराया था।
माधुरी सिंह का आरोप है कि नगर पालिका कार्यालय में कार्यरत कुछ अधिकारियों और कर्मचारियों द्वारा उनके पति पर कथित रूप से फर्जी फाइलें तैयार करने का दबाव बनाया जा रहा था। विरोध करने पर उनके साथ मारपीट की गई और बाद में उन्हें मूल कार्य से हटाकर कचरा गाड़ियों की गणना के काम में लगा दिया गया। पत्नी के अनुसार इस घटना से दिलीप सिंह मानसिक रूप से काफी परेशान रहने लगे थे और इसे अपने सम्मान से जोड़कर देख रहे थे।
सुनवाई के दौरान मृतक की पत्नी ने अदालत में लिखित आपत्ति दाखिल कर जमानत याचिका का विरोध किया। वहीं सरकारी पक्ष ने भी अग्रिम जमानत दिए जाने का विरोध किया। सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने नागेंद्र सिंह गुर्जर की अग्रिम जमानत याचिका निरस्त कर दी, जिससे उनकी कानूनी मुश्किलें और बढ़ गई हैं।