झांसी न्यूज डेस्क: भाजपा के भीतर मचे आंतरिक कलह के कारण नगर निगम का बजट अधर में लटक गया है। अप्रैल का महीना बीतने को है, लेकिन आपसी खींचतान की वजह से इसके पास होने की कोई उम्मीद नजर नहीं आ रही है। बजट पारित न होने से निगम प्रशासन के सामने गंभीर आर्थिक संकट खड़ा हो गया है, जिसके कारण अधिकारियों को रोजमर्रा के कार्यों के भुगतान के लिए विशेष वित्तीय अनुमति का सहारा लेना पड़ रहा है।
नियमों के अनुसार, वित्तीय वर्ष का बजट मार्च तक स्वीकृत हो जाना चाहिए, लेकिन 12 अप्रैल को बुलाई गई सदन की बैठक हंगामे के कारण स्थगित हो गई। इसके बाद भाजपा पार्षद दो गुटों में बंट गए हैं। सदन के नेता नरेंद्र नामदेव के नेतृत्व में एक धड़े ने महापौर बिहारी लाल आर्य के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए उन पर निष्क्रियता और जनहित के कार्यों में बाधा डालने के गंभीर आरोप लगाए हैं।
राजनीतिक टकराव का सीधा असर निगम की आर्थिक स्थिति पर पड़ रहा है। इस साल के बजट में करीब 21.82 करोड़ रुपये के घाटे का अनुमान लगाया गया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 17 करोड़ रुपये अधिक है। भाजपा के संगठन पदाधिकारियों ने इस मामले को सुलझाने की कोशिश की है, लेकिन पार्षदों की नाराजगी और 22 हस्ताक्षरित शिकायतों के कारण फिलहाल कोई समाधान निकलता नहीं दिख रहा है।
इन तमाम विवादों के बीच महापौर बिहारी लाल आर्य ने आश्वासन दिया है कि जल्द ही नई तारीख तय कर बजट को मंजूरी दिला दी जाएगी। हालांकि, जब तक सदन में शांति नहीं होती, तब तक विकास कार्यों और निगम के खर्चों पर अनिश्चितता के बादल छाए रहेंगे। पिछले साल का शेष फंड फिलहाल राहत दे रहा है, लेकिन बजट में देरी शहर की बुनियादी सुविधाओं पर भारी पड़ सकती है।