झांसी न्यूज डेस्क: झांसी जिले में हाल ही में आई आंधी, बारिश और ओलावृष्टि के बाद किसानों को राहत की उम्मीद थी, लेकिन प्रशासनिक जांच रिपोर्ट ने उनकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। झांसी की सभी तहसीलों से आई रिपोर्ट के अनुसार फसलों को अधिकतम 10 फीसदी तक ही नुकसान हुआ है, जो आपदा राहत के लिए तय 33 फीसदी के मानक से काफी कम है। ऐसे में किसानों को फसल नुकसान के लिए कोई मुआवजा नहीं मिलेगा।
अप्रैल की शुरुआत में अचानक बदले मौसम और पश्चिमी विक्षोभ के असर से जिले में तेज हवाएं, बारिश और ओले गिरे थे। जिन किसानों की फसलें खेतों में कटी पड़ी थीं, वे उन्हें बचाने के लिए परेशान नजर आए। कई किसानों ने ओलावृष्टि से नुकसान की शिकायत भी की थी, जिसके बाद प्रशासन ने सभी तहसीलों में जांच टीमें भेजकर रिपोर्ट तलब की थी।
जिलाधिकारी मृदुल चौधरी के निर्देश पर गठित टीमों ने झांसी, मोंठ, टहरौली, गरौठा और मऊरानीपुर तहसीलों में सर्वे किया। जांच में सामने आया कि कुछ क्षेत्रों—जैसे मोंठ, बबीना और बड़ागांव—में करीब 10 फीसदी तक नुकसान हुआ, जबकि अन्य जगह इससे भी कम असर पाया गया। अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) वरुण पाण्डेय ने स्पष्ट किया कि 33 फीसदी से कम नुकसान पर राहत का प्रावधान नहीं है।
हालांकि, इस मौसम के असर से कुछ कच्चे मकानों को नुकसान और पशुओं की मौत की घटनाएं सामने आई हैं, खासकर मऊरानीपुर क्षेत्र में। ऐसे मामलों में प्रभावित लोगों को आपदा राहत विभाग की ओर से सहायता राशि दी जाएगी। प्रशासन ने कहा है कि नुकसान का आकलन पूरा हो चुका है और पात्र लोगों को जल्द राहत उपलब्ध कराई जाएगी।