झांसी न्यूज डेस्क: बुंदेलखंड की धरती पर महिलाओं ने हमेशा हर क्षेत्र में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई है, चाहे वह युद्धभूमि हो, सामाजिक सरोकार हों या फिर व्यापार और कारोबार। यहां की महिलाएं छोटे से छोटे काम को भी मेहनत और लगन से बड़े मुकाम तक पहुंचाने का जज़्बा रखती हैं। आमतौर पर पुरुषों से जोड़े जाने वाले आटा चक्की जैसे काम में भी महिलाओं ने अपनी काबिलियत साबित की है, और इसका बेहतरीन उदाहरण हैं झांसी की सुनीता साहू।
झांसी सदर तहसील के बबीना ब्लॉक अंतर्गत सिमरावरी गांव की रहने वाली सुनीता साहू ने सीमित संसाधनों और कमजोर आर्थिक स्थिति के बावजूद हार नहीं मानी। उन्होंने स्वयं सहायता समूह से दो लाख रुपये का लोन लेकर आटा चक्की का कारोबार शुरू किया। शुरुआती दिनों में काम धीमा रहा, लेकिन परिवार के निरंतर सहयोग और अपने आत्मविश्वास के बल पर उन्होंने इस व्यवसाय को आगे बढ़ाया।
लगातार मेहनत और समर्पण का नतीजा यह रहा कि पहले जहां आटा चक्की से हर महीने कुछ हजार रुपये की ही आमदनी होती थी, वहीं अब कमाई में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हो चुकी है। इसी व्यवसाय के जरिए सुनीता साहू ने लोन चुकाने में भी सफलता हासिल की। घर पर ही आटा चक्की होने से परिवार की आर्थिक स्थिति पहले से कहीं ज्यादा मजबूत हो गई है।
स्थानीय लोगों के बीच भी सुनीता साहू की आटा चक्की की खास पहचान बन चुकी है। ग्रामीणों का कहना है कि यहां पिसा आटा स्वाद और गुणवत्ता में बेहतर होता है, साथ ही दाम भी अन्य जगहों से कम हैं। यही वजह है कि अब सिमरावरी गांव ही नहीं, बल्कि आसपास के कई गांवों से लोग गेहूं पिसवाने सुनीता की आटा चक्की पर पहुंच रहे हैं, जिससे उनका कारोबार लगातार विस्तार कर रहा है।